मोहम्मद दीब (1920–2003) त्लेमसेन और आधुनिक अल्जीरियाई साहित्य से जुड़े प्रमुख लेखकों में गिने जाते हैं। उनका जन्म त्लेमसेन में हुआ, उन्होंने वहीं पढ़ाई शुरू की और आगे की शिक्षा का एक भाग मोरक्को के औजदा में पूरा किया। लेखक बनने से पहले वे शिक्षक, प्रशासनिक कर्मचारी और कालीन डिज़ाइन से जुड़े कामों में रहे।
मोहम्मद दीब (1920–2003) त्लेमसेन और आधुनिक अल्जीरियाई साहित्य से जुड़े प्रमुख लेखकों में गिने जाते हैं। उनका जन्म त्लेमसेन में हुआ, उन्होंने वहीं पढ़ाई शुरू की और आगे की शिक्षा का एक भाग मोरक्को के औजदा में पूरा किया। लेखक बनने से पहले वे शिक्षक, प्रशासनिक कर्मचारी और कालीन डिज़ाइन से जुड़े कामों में रहे।
वे कवि, उपन्यासकार और पत्रकार के रूप में प्रसिद्ध हुए। 1950 के दशक में उन्होंने Alger Républicain के लिए लिखा। La Grande Maison, L’Incendie और Le Métier à tisser जैसे उपन्यासों ने औपनिवेशिक दौर के अल्जीरियाई जीवन को साहित्यिक रूप दिया।
1959 में औपनिवेशिक अधिकारियों ने उन्हें अल्जीरिया से निष्कासित कर दिया और वे फ्रांस में बस गए। फिर भी अल्जीरिया, स्मृति, भाषा और निर्वासन उनके लेखन के केंद्र में रहे। उन्हें Prix Fénéon, Grand Prix de la Francophonie और Prix Mallarmé जैसे सम्मान मिले। उनका निधन 2 मई 2003 को हुआ।
Selected works
- La Grande Maison (1952)
- L’Incendie (1954)
- Le Métier à tisser (1957)
- Qui se souvient de la mer (1962)
- La Danse du roi (1968)
- Habel (1977)
- Les Terrasses d’Orsol (1985)
- Le Sommeil d’Ève (1989)
- Neiges de marbre (1990)
- L’Infante maure (1994)
- L’Enfant jazz (1998)
- L.A. Trip (2003)












