जीवन
बशीर हाज अली का जन्म 10 दिसंबर 1920 को अल्जीयर्स की कस्बा में हुआ। उन्होंने उन्नीस वर्ष की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी और 1945 के अंत में Algerian Communist Party से जुड़ गए। 1948 में वे Liberte के प्रधान संपादक बने। 1954 से पहले उन्हें दो वर्ष की कैद की सजा भी मिली।
राष्ट्रीय मुक्ति युद्ध शुरू होने के बाद उन्होंने Saddek Hadjess के साथ "les combattants de la liberte" को संगठित किया और FLN के साथ बातचीत में हिस्सा लिया। 1965 के तख्तापलट के बाद उन्होंने Hocine Zehouane के साथ Organisation de la resistance populaire बनाई। कुछ महीनों बाद उन्हें गिरफ्तार कर यातना दी गई।
रचना और संदर्भ
जेल में उन्होंने L'Arbitraire लिखा, जिसे Editions de Minuit ने 1966 में प्रकाशित किया। Lucette Hadj Ali ने बताया कि पांडुलिपि Lambese जेल में टॉयलेट पेपर पर लिखी गई और मुलाकातों के दौरान सिगरेट पेपर में छिपाकर बाहर लाई जाती थी। हाज अली 1970 तक जेल और नजरबंदी में रहे।
रिहा होने के बाद वे फिर से व्याख्यानों, लेखों और निबंधों में सक्रिय हुए। बाद में बीमारी ने उन्हें कई वर्षों तक बिस्तर पर रोक दिया। 8 मई 1991 को उनका निधन हुआ। उनकी कविताएं और गवाही अल्जीरिया की राजनीतिक और सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ी रहती हैं।
चयनित रचनाएं
- Chants pour le 11 décembre
- Notre peuple vaincra
- Culture nationale et révolution
- L'Arbitraire
- Que ma joie demeure!
- Le Mal de vivre et la volonté d'etre dans la jeune poesie algerienne d'expression francaise
- Memoire-clairiere
- Actuelles Partitions pour demain
- Soleils sonores












